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शिल्पा भट्ट बहुगुणा: एक महिला, जिसका एक्कै मकसद-कोई भूखा न रह जाए

शिल्पा भट्ट बहुगुणा: एक महिला, जिसका एक्कै मकसद-कोई भूखा न रह जाए

हमरा एक्कै मकसद है, बदला... अगर आप फिल्मों के शौकीन हैं तो इस डायलॉग से वाकिफ होंगे। ये डायलॉग सुपरहिट फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर का है। वैसे ये डायलॉग तो फिल्मी है लेकिन इससे ही मिलती जुलती बात शिल्पा भट्ट बहुगुणा भी कहती हैं। शिल्पा भट्ट बहुगुणा का भी एक्कै मकसद है, कोई भूखा न रह जाए... इस मकसद को पूरा करने के लिए शिल्पा भट्ट बहुगुणा लॉकडाउन में भी सड़कों पर हैं। शिल्पा सड़कों पर इसलिए हैं ताकि कोई गरीब, लाचार, बुजुर्ग या कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे लोग भूखा न रह जाए। उत्तराखंड के देहरादून की रहने वाली शिल्पा भट्ट बहुगुणा पेशे से कारोबारी हैं। देहरादून में रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में एक विशेष पहचान बना चुकी शिल्पा ने लॉक डाउन शुरू होते ही ऐसे लोगों की मदद का बीड़ा उठाया जिन्हें खाना तक नसीब नहीं हो रहा था। जिस वक्त आम लोग घरों में कैद थे उस वक्त शिल्पा ने अपने कुछ कर्मचारियों के साथ
100CC: आजतक के पत्रकार जिसकी किताब ने मचाई है धूम

100CC: आजतक के पत्रकार जिसकी किताब ने मचाई है धूम

क्राइम की खबरों से अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले आजतक के सीनियर पत्रकार श्‍याम सुंदर गोयल एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार वह अपनी किताब ''100CC बाइक पर भारत में रोमांचक सफर'' की वजह से सुर्खियां बटोर रहे हैं. प्रभात प्रकाशन पब्लिकेशन से प्रकाशित ये किताब श्‍याम सुंदर गोयल का यात्रा वृतांत है. किताब के प्रकाशन की जानकारी देते हुए श्‍याम सुंदर गोयल ने बताया, '' 2013 में 100 सीसी बाइक से अकेले यात्रा का जो सफर शुरू हुआ था, उसको लेकर कभी-कभी ऐसा भी लगा कि कहीं ब्रेक न लग जाये...लेकिन धीरे-धीरे 6 सालों में 25 हजार किलोमीटर का सफर तय कर ही लिया.'' बता दें कि इस किताब का विमोचन हाल ही में भोपाल में हुआ है. इसके विमोचन में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल समेत कई दिग्‍गज नेता शामिल हुए. इसके अलावा पत्रकारिता और समाजिक सुधार से जुड़े लोग भी किताब के विमोचन का गवाह बने. क्‍या खास है इस किताब
बिहार : पिता कोर्ट में थे चपरासी, अब बिटिया बनी जज!

बिहार : पिता कोर्ट में थे चपरासी, अब बिटिया बनी जज!

कहा जाता है कि अगर लक्ष्य के प्रति कठिन परिश्रम और समर्पण भाव से कोई जुट जाए तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं है। अदालत में चपरासी की नौकरी करने वाले की बिटिया अर्चना अपने पिता के सरकारी झोपड़ीनुमा क्वोर्टर में ही जज बनने का सपना देखा था और आज उसका सपना पूरा हो गया। अर्चना को हालांकि इस बात का अफसोस है कि इस खुशी के मौके पर उनके पिता मौजूद नहीं हैं। अर्चना ने आईएएनएस से कहा कि उनके "पिता गौरीनंदन प्रतिदिन किसी न किसी जज का 'टहल' बजाते थे, जो बचपन में एक बच्चे को अच्छा नहीं लगता था। उसी स्कूली शिक्षा के दौरान ही उस चपरासी क्वोर्टर में मैंने जज बनने की प्रतिज्ञा ली थी और आज ईश्वर ने उस प्रतिज्ञा को पूरा कर दिया है।" अर्चना कहती हैं, "सपना तो जज बनने का देख लिया था, परंतु इस सपने को साकार करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। शादीशुदा और एक बच्चे की मां होने के बावजूद मैंने हौसला रखा और आज मे
बिहार: परिवार ने कहा-तुमसे न हो पाएगा.. बेटी ने जज बनकर दिखाया

बिहार: परिवार ने कहा-तुमसे न हो पाएगा.. बेटी ने जज बनकर दिखाया

32 साल की उम्र में लड़की की शादी न हो तो समाज में रह रहे कई लोग बातें बनानी शुरू कर देते हैं। लेकिन वो ये नहीं जानते कुछ लड़कियों का मकसद सिर्फ शादी करना और बच्चे पैदा करना नहीं होता। ये सब करने से पहले वह अपना करियर बनाना चाहती हैं। ऐसी ही सोच बिहार के सुपौल की रहने वाली श्वेता शारदा की है। श्वेता शारदा ने 30वीं बिहार न्यायिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा में 33वीं रैंक हासिल की है। इस सफलता के बाद शारदा ने बताया कि जैसे जैसे मेरी उम्र बढ़ रही थी घरवाले शादी का प्रेशर बना रहे थे, लेकिन मैंने जिद्द पकड़ ली थी कि शादी जज बनने के बाद ही करूंगी। श्वेता शारदा का बिहार न्यायिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा का ये दूसरा प्रयास था। इससे पहले उन्होंने ये परीक्षा 2017 में दी, जिसमें वह इंटरव्यू में 2 नंबर से रह गई थी। श्वेता ने बताया मैंने जुडिशरी परीक्षा की देने की शुरुआत 0।साल 2013 में हरियाणा जुडिशर
SPG के रिटायर्ड जवान से ट्रेनिंग ले रहीं महिला पुलिसकर्मी

SPG के रिटायर्ड जवान से ट्रेनिंग ले रहीं महिला पुलिसकर्मी

वैसे तो पुलिस की नौकरी में ट्रेनिंग पहले से ही मिलती है लेकिन महिला पुलिसकर्मियों को अतिरिक्त ट्रेनिंग की जरूरत होती है। इसी के तहत हाल ही में यूथ पाठशाला फाउंडेशन की अगुवाई में गुरुग्राम पुलिस लाइन में इस शिविर का आयोजन किया गया है। पांच दिवसीय ट्रेनिंग शिविर में गुरुग्राम की 50 महिला पुलिसकर्मियों को एसपीजी के पूर्व जवानों द्वारा नई तकनीक और विशेष हथियारों के जरिए आत्मरक्षा व सुरक्षा का विशेष ट्रेनिंग दिया गया है। ट्रेनिंग के दौरान द्वारा विशेष शस्त्रों द्वारा दुनिया भर में आत्मरक्षा और हॉस्टेज रेस्क्यू से जुड़ी सबसे आधुनिक विधियों का प्रशिक्षण दिया गया। इनमें एके 47, पिस्टल अटैक, नाइफ अटैक,चोक अटैक, स्टिक अटैक सहित कई अन्य विधाओं की ट्रेनिंग दी गई। इस शिविर के समापन समारोह के दौरान प्रशिक्षित महिला पुलिस कर्मियों में से पांच कर्मियों को विशेष प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।
बिहार : भागलपुर जेल में बनी कैदियों की आर्केस्ट्रा टीम

बिहार : भागलपुर जेल में बनी कैदियों की आर्केस्ट्रा टीम

अगर आप भागलपुर स्थित विशेष केंद्रीय कारा (जेल) के पास से गुजर रहे हों और जेल के अंदर से किसी वाद्ययंत्र की धुन सुनाई दे तो चौंकिएगा नहीं, भागलपुर जेल प्रशासन अब यहां के कैदियों को संगीत की शिक्षा दिलाकर एक आर्केस्ट्रा टीम तैयार की है। दरअसल, जेल प्रशासन कैदियों को संगीत से जोड़कर अब उनकी सोच बदलने के प्रयास में जुटी है। जेल प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि जेल में संगीत से जुड़े 22 सजायाफ्ता कैदियों की एक टीम तैयार की गई है, जिन्हें कोलकाता और भागलपुर के कलाकार प्रशिक्षण दे रहे हैं। भागलपुर जेल में कैदियों को प्रशिक्षित कर 'कैदी बैंड' के साथ आर्केस्ट्रा टीम तैयार की गई है। टीम में 8 से 10 कैदी गायक और डांसर हैं। जेल प्रशासन का मानना है कि कैदियों को संगीत से जोड़कर उनके मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है, जिससे उनके जीवन में बदलाव के साथ उनके अंदर की आपराधिक प्रवृत्ति समाप्त हो ज
चुनाव 2019- मतदाता का हल्का होना लोकतंत्र का खोखला हो जाना है

चुनाव 2019- मतदाता का हल्का होना लोकतंत्र का खोखला हो जाना है

पढ़ें टीवी एंकर रविश कुमार का लेख.. मैं फील्ड में कभी यह सवाल नहीं करता कि आप किसे वोट देंगे। इस सवाल में मेरी दिलचस्पी नहीं होती है। मैं यह ज़रूर देखना चाहता हूं कि एक मतदाता किस तरह की सूचनाओं और धारणाओं से ख़ुद को वोट देने के लिए तैयार करता है। आज बाग़पत ज़िले के कई नौजवानों से मिला। शहरी नौजवानों की तरह किसी ने कहा नहीं या फिर जताया नहीं कि वे मुझे जानते हैं। मैं ऐसे ही नौजवानों के बीच जाना चाहता था जो मुझे ठीक से नहीं जानते हों। इन नौजवानों की कुल संख्या सत्तर-अस्सी तो आराम से रही होगी या उससे भी अधिक हो सकती है। ये सभी सरकारी प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करने वाले नौजवान हैं। जिनके मुद्दे मैं लगातार डेढ़ साल से उठा रहा हूं। मेरे कार्यक्रमों को इन नौजवानों तक शत-प्रतिशत न पहुंचने देने के कई कारण हो सकते हैं पर मेरा फोकस यह नहीं था। ज़रूरी नहीं कि हर कोई मुझे जाने ही। इन नौजवानों
बिहार : 90 साल की गोदावरी दत्त, जिन्हें पद्म श्री सम्मान दिया गया है

बिहार : 90 साल की गोदावरी दत्त, जिन्हें पद्म श्री सम्मान दिया गया है

देश के बड़े सम्मानों में से एक पद्मश्री पुरस्कार के लिए नामों का चयन हो गया है। इस लिस्ट में खास से लेकर आम हस्तियों तक को शामिल किया गया है। इन्हीं नामों में से एक बिहार की गोदावरी दत्त का भी नाम है। गोदावरी दत्त मिथिला पेंटिंग की शिल्पगुरु मानी जाती हैं। 90 साल की गोदावरी दत्त ने मिथिला पेंटिग को घर से निकालकर देश दुनिया में पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। काफी वृद्ध होने के बाद भी वह अपनी पेंटिंग के हुनर से ऐसी पेंटिंग बनाती हैं कि देखने वाले मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। गोदावरी दत्त पिछले 5 दशक से बिहार मधुबनी में मिथिला पेंटिंग पर काम कर रही हैं। बड़ी संख्या में लोग मधुबनी पेंटिंग इनसे सीखने आते हैं। अबतक वे कई बार अलग-अलग देशों का दौरा कर चुकी हैं। विदेश में इस शिल्प को स्थापित कर चुकी हैं। उन्होंने हाल ही में बिहार म्यूजियम में एक बड़ी पेंटिंग उकेर कर खूब प्रसिद्धि बटोरी है. इनक
बिहार की राजकुमारी देवी जिन्हें मिला पद्म श्री, पीएम मोदी भी कर चुके हैं तारीफ

बिहार की राजकुमारी देवी जिन्हें मिला पद्म श्री, पीएम मोदी भी कर चुके हैं तारीफ

26 जनवरी के मौके पर देश के अलग—अलग क्षेत्र की हस्तियों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। भारतीय क्रिकेटर गौतम गंभीर समेत कई ऐसे लोगों को यह सम्मान मिला है जो पहले से ही चर्चित रही हैं। वहीं कई ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और दूसरों से अलग होने की वजह से यह सम्मान ​हासिल किया है। उन्हीं में से एक हैं बिहार के मुजफ्फरपुर की राजकुमारी देवी। राजकुमारी देवी को लोग किसान चाची और साइकिल चाची के नाम भी जानते हैं। मुजफ्फरपुर के सरैया प्रखंड के आनंदपुर गांव की राजकुमारी देवी पहले 'साइकिल चाची और फिर किसान चाची बनीं। पहले उन्हें किसानश्री और अब पद्मश्री से नवाजा गया है। मुजफ्फरपुर जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर सरैया प्रखंड का आनंदपुर गांव में रहने वाली राजकुमारी की उम्र जब 15 साल थी तभी उनकी शादी हो गई। शिक्षक पिता ने प्यार से पाला था, मगर ससुराल में स्थिति उलट थी। जब तक कुछ
बिहार की बेटी जिसने अमेरिकी संसद में लगाया ‘भारत माता की जय’ का नारा

बिहार की बेटी जिसने अमेरिकी संसद में लगाया ‘भारत माता की जय’ का नारा

अमेरिकी प्रशासन में भारतवंशी कई अहम पदों पर नियुक्त हो चुके हैं। इस कड़ी में अब बिहार के मुंगेर जिले में जन्मीं मोना दासा (Senator Mona Das) का नाम भी जुड़ गया है। वे वॉशिंगटन राज्य के 47वें जिले की सीनेटर चुनी गई हैं। मोना डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं। उन्होंने सीनेट में गीता हाथ में रखकर अपने पद की शपथ ली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने अपनी स्पीच के अंत में 'जय हिंद' और 'भारत माता की जय' के नारे भी लगाए। शपथग्रहण 14 जनवरी को हुई थी। मोना दास ने रिपब्लिकन पार्टी से दो बार सीनेटर रह चुके जो फेन को हराया है. मोना दास सीनेट ट्रांसपोर्ट कमिटी, सीनेट फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन्स, इकोनॉमिक डिवलेपमेंट ऐंड ट्रेंड कमिटी में अपनी सेवाएं देंगी। 8 साल की उम्र में अमेरिका आ गईं मोना दास जब 8 साल की थीं तो अपने माता-पिता के साथ यूएस चली गई थीं. उन्हें अपनी विरासत पर गर्व भी है और उससे प्यार भी। मोना
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