townaajtak@gmail.com

अपनी बात

कोरोना पर ये कैसी चाल, चुनाव के लिए रैली, पूजा के लिए समाजिक दूरी

कोरोना पर ये कैसी चाल, चुनाव के लिए रैली, पूजा के लिए समाजिक दूरी

राजेश तिवारी की रिपोर्ट जहां एक तरफ त्योहारी सीजन चल रहा है, वहीं चुनावी में बड़ी रैलियां ये साबित कर रहा है कि कोरोना महामारी अब सरकार की साजिश बन गई है। इस साजिश को आप उदाहरण से समझते हैं।दरअसल, दशहरा के दौरान विकास खंड बनकटा के परिक्षेत्र व सोहनपुर संवाददाता सोहनपुर कुमार प्रसाद गौंड़ की मिशन ग्रामोदय के संचालक से जमीनी तहकीकात की गई। सदियों से चली आ रही दुर्गा पुजा की परम्परा पर कोरोना महामारी की वजह से तमाम बंदिशें लगा दी गई हैं, जिससे सबकुछ उदास व फीका फीका गुजर रहा है। सोहनपुर में हर वर्ष आकर्षण का केंद्र पंडाल व मेले का हुजूम लोगों के मेल मिलाप और सौहार्द्र का एक संगम था, वह विरान और शांत लग रहा है। प्रशासन किसी भी प्रकार के कार्यक्रम की अनुमति नहीं दे रही है। वहीं चुनावी क्षेत्रों में कोरोना का कोई प्रभाव या बंदिश देखने को नहीं मिल रही है। रैलियां व सभाएँ जोर शोर से चल रही
सीवान NDA के वो नेता जिनसे ओमप्रकाश यादव का विवाद है…

सीवान NDA के वो नेता जिनसे ओमप्रकाश यादव का विवाद है…

लेखक—सुधीर कुमार ''एनडीए के नेता पास में ही रहकर पीठ में खंजर घोंपने की फिराक में हैं। मुझे पहले राजद के लोगों से खतरा था लेकिन अब एनडीए के लोग भी मेरी जान के दुश्मन हैं।'' सीवान के पूर्व सांसद ओमप्रकाश यादव ने मंगलवार को ये बात कहकर हर किसी को हैरान कर दिया है। कभी लोकसभा चुनाव में राजद के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन को हराकर मीडिया की सुर्खियां बटोरने वाले ओमप्रकाश यादव की बातों से साफ है कि वह अपने यानी एनडीए खेमे में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। यह पहली बार है जब ओमप्रकाश यादव ने खुले तौर पर खुद को लेकर सीवान एनडीए के नेताओं पर आरोप लगा रहे हैं। इस सच से इनकार नहीं किया जा सकता कि आमतौर पर कम बोलने वाले ओमप्रकाश यादव के खिलाफ एनडीए के कई नेता मुखर हो गए हैं। इसमें बीजेपी और जेडीयू दोनों दलों के नेता शामिल हैं। इसमें सबसे बड़ा नाम अजय सिंह का आता है। जेडीयू की सांसद कवित
सीवान: हर मुद्दे पर मौन क्यों रहती हैं सांसद कविता सिंह?

सीवान: हर मुद्दे पर मौन क्यों रहती हैं सांसद कविता सिंह?

लेखक— सुधीर कुमार सीवान के आंदर थाना क्षेत्र का जयजोर गांव, 7 लोगों ने मिलकर एक महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। दुष्कर्म के बाद वीडियो भी बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर कार्रवाई की लेकिन पीड़िता ने कई दिनों तक बयान दर्ज नहीं कराया। इस पूरे प्रकरण में सीवान के प्रशासन की तो सक्रियता दिखी लेकिन महिलाओं में जिले की सर्वोच्च जनप्रतिनिधि की खामोशी से हर कोई हैरान है।  जी हां, सही समझा आपने। हम बात सीवान की पहली महिला सांसद कविता सिंह के बारे में बात कर रहे हैं। दरअसल,  2019 लोकसभा चुनाव में राजद उम्मीदवार हीना शहाब को हराकर कविता सिंह पहली बार सीवान की सांसद चुनी गई हैं। कविता सिंह सीवान लोकसभा से पहली महिला सांसद भी हैं। ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि कविता सिंह  महिला होने के नाते महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर मुखर रहेंगी। लेकिन ऐसा देखने को नहीं
कोटा में फँसे बिहार के छात्र, बच्चों जैसे बहाने बनाती बिहार सरकार

कोटा में फँसे बिहार के छात्र, बच्चों जैसे बहाने बनाती बिहार सरकार

नोट—ये लेख पत्रकार रविश कुमार के फेसबुक वॉल से लिया गया है असम सरकार ने डबल इंजन चार्टड विमान से अधिकारियों का दल जयपुर भेजा है। ताकि असम से जयपुर की यात्रा का समय बचें और वे कोटा जाकर अपने छात्रों को ले आएँ। इन छात्रों को विमान से नहीं ले जाया जाएगा। उधर बिहार सरकार ज़िद पर अड़ी है। पटना हाईकोर्ट में कहा है कि वह तालाबंदी के नियमों का पालन सख़्ती से कर रही है। हंसी आती है। क्या बिहार सरकार यह कह रही है कि बाक़ी राज्य तालाबंदी के नियमों को तोड़ कर अपने छात्रों को ला रहे हैं? तालाबंदी के नियम कोई अंतिम बार के लिए नहीं बने हैं। रोज़ इनमें ढील दी जा रही है। बदलाव हो रहे हैं। अगर इतने सारे राज्यों ने नियमों को तोड़ कर अपने छात्रों को वापस बुला लिए हैं तो क्या उन्हें इस अपराध के लिए सज़ा भी मिलेगी ? हाई कोर्ट ही बता दें या नीतीश कुमार वो किताब दिखा दें जहां लिखा है कि बाक़ी राज्यों
क्या कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सिर्फ औपचारिकता निभा रहा है सीवान?

क्या कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सिर्फ औपचारिकता निभा रहा है सीवान?

आज की तारीख में कोरोना वायरस सबसे बड़ा संकट बन चुका है। लॉकडाउन की वजह से जिंदगियां कमरे में बंद हैं। इस दौर से बिहार का सीवान जिला भी गुजर रहा है। बिहार के सीवान जिले को कोरोना का हॉटस्पॉट माना गया है। लेकिन जिले के लोग उस दौर से गुजर रहे हैं, जहां कोरोना के खिलाफ लड़ाई औपचारिकता भर लगती है। लापरवाही का नतीजा.. ये बात हम कहें भी क्यो नहीं। एक व्यक्ति खाड़ी देश से सीवान में आता है, एयरपोर्ट पर थर्मल स्क्रिनिंग की जाती है। एयरपोर्ट प्रशासन के आदेश के बाद वह सीवान के पंजवार नामक गांव में आ जाता है। उसे क्वारंटाइन किया जाता है। क्वारंटाइन के दौरान वह शख्स खुलेआम गांव में घूमता है। कुछ दिन बाद बिहार सरकार जब जांच करती है तो उस शख्स का रिपोर्ट कोरोना पाॅजिटिव आ जाता है। तब तक वह पूरे गांव में कोरोना को बांट चुका होता है। आनन—फानन में गांव को सील कर दिया जाता है, जो बेहद ही आवश्यक कदम
चौतरफा आलोचना, फिर भी क्यों फलफूल रही नौकरशाही?

चौतरफा आलोचना, फिर भी क्यों फलफूल रही नौकरशाही?

ये लेख सीवान के चर्चित डॉ अनुपम आदित्य ने लिखा है हाल ही में प्रकाशित शोध स्पष्ट करती है कि आलोचना के बावजूद, नौकरशाही अभी भी यथोचित प्रदर्शन कर रही है| यही कारण है कि संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक सन्दर्भ में भारतीय नौकरशाही लगभग उतनी ही मजबूत बनी हुई है जितनी कि ब्रिटिश काल में थी। कुल मिलाकर, नौकरशाही आज भी प्रशासन की निरंतरता बनाये रखने और समाज में सांस्कृतिक एकीकरण, आर्थिक विकास और राजनीतिक स्थिरता में यथोचित प्रदर्शन कर रही है प्रशासनिक कुशलता, दक्षता और तीव्रता सार्वजनिक सेवा में उत्कृष्ट प्रदर्शन जैसे 248 महत्वपूर्ण गुण, निर्धारक या दक्षतायें हैं, और अनेक ब्यूरोक्रेट अभी भी इन मानदण्डों पर खरे उतरते हैं । इन्ही लोगों की उत्कृष्टता नौकरशाही को मरने नहीं देती| हालांकि नौकरशाही को पूरी दुनिया में एक बड़ा प्रशासनिक बोझ समझा जाता है, किन्तु लोकसेवा हेतु इससे महत्वपूर्ण संगठनात्मक या
बिहार में कोरोना से मौत, डॉक्टरों की लापरवाही ने बढ़ाई टेंशन!

बिहार में कोरोना से मौत, डॉक्टरों की लापरवाही ने बढ़ाई टेंशन!

ये पोस्ट एनडीटीवी के पत्रकार रविश कुमार ने अपने फेसबुक पेज पर शेयर किया है पटना में कोरोना से संक्रमित मरीज़ की मौत हो गई है। यह मौत बता रही है कि कोरोना वायरस को लेकर यह राज्य किस तरह से तैयार नहीं था। यह वक्त किसी नेता के लिए जनमानस बनाने का नहीं है बल्कि तैयारियों को लेकर सख्त सवाल करने का है। हम एक नागरिक समाज के तौर पर यह काम नहीं कर रहे हैं। यह काम तो वैसे दो महीने पहले से करना चाहिए था। ख़ैर आप लोगों ने जो फैसला किया होगो वो सोच समझ कर ही किया होगा लेकिन क्या उस फैसले पर पहुंचने से पहले आपने तैयारियों से संबंधित सारे तथ्य देख लिए थे, उनकी जांच कर ली थी? दो महीने से पूरी दुनिया में कोरोना को लेकर आतंक मचा हुआ है। सरकारें दिन रात जाग रही हैं लेकिन इसके बाद भी बिहार में इसकी तैयारी का आलम यह है कि मरीज़ अस्पताल में मर गया। उसका शव लेकर परिवार के लोग चले गए और उसके कई घंटे बाद
MY समीकरण से निकल रहे तेजस्वी, सवर्ण को दिया राज्‍यसभा का टिकट

MY समीकरण से निकल रहे तेजस्वी, सवर्ण को दिया राज्‍यसभा का टिकट

बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सी़ पी़ ठाकुर के पुत्र विवेक ठाकुर को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया, उसके बाद मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी भूमिहार नेता अमरेंद्र धारी सिंह को अपना प्रत्याशी घोषित कर सबको चौंका दिया। राजद ने भूमिहार समुदाय से आने वाले अमरेंद्र धारी सिंह को उम्मीदवार घोषित किया है। ऐसे में कहा जाने लगा है कि राजद अब अपने अपने कोर वोटबैंक मुस्लिम-यादव के अलावा नए वोटबैंक की तलाश भी शुरू कर दी है। बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की अनुपस्थिति में तेजस्वी यादव के चुनावी कौशल और रणनीति की इसमें बड़ी परीक्षा होनी है। लोकसभा चुनाव में असफल हो चुके तेजस्वी के लिए यह विधानसभा चुनाव 'अग्निपरीक्षा' मानी जा रही है। ऐसे में राजद ने भूमिहार तबके से आने वाले अमरेंद्
लालू के चहेते शहाबुद्दीन को नजरअंदाज कर रहे हैं तेजस्वी?

लालू के चहेते शहाबुद्दीन को नजरअंदाज कर रहे हैं तेजस्वी?

हार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारी में जुटे राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने गुरुवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की घोषणा कर दी। सबसे हैरान करने वाली बात है कि सीवान के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन इस समिति से बाहर हैं। हालांकि, शहाबुद्दीन की जगह पर उनकी पत्नी हिना शहाब को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह मिली है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या तेजस्वी यादव अब शहाबुद्दीन से कन्नी काट रहे हैं। ये सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि तमाम विवादों के बावजूद भी पूर्व में लालू प्रसाद ने शहाबुद्दीन को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल रखा था।  सूत्रों के मुताबिक इस बार के राष्ट्रीय कार्यकारिणी में तेजस्वी यादव की खूब चली है और इसी की वजह से लालू के बेहद करीबी शाहबुद्दीन को इस बार कार्यकारिणी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। बता दें कि शहाबुद्दीन फिलहाल दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद

ये कैसा शहर! बुजुर्ग पिता को बीच सड़क पर मरने के लिए छोड़ा

कभी कभी इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटनाओं से पाला पड़ता है. आज सुबह 7:48 पर ऑफिस जाते हुए नोएडा-दिल्ली एक्सप्रेस वे पर एक बूढ़ा आदमी दिखा जो हाथ में लाठी लिए और दूसरे हाथ से हवा को टटोलता हुआ सड़क के दूसरी तरफ जाने की कोशिश कर रहा था. 100-120 किलोमीटर की रफ्तार से चलती गाड़ियां उसके आसपास से सांय सांय कर के गुज़र रहीं थी और वो बस आगे चल रहा था, ये सोचकर की एक्सप्रेस वे की दूसरी तरफ पहुंच जाऊं किसी तरह... हमने गाड़ी किनारे रोकी उस बूढ़े आदमी तक पहुंचे तो पता चला कि सिर पर पगड़ी पहने, मटमैली धोती और हाथ में लाठी लिए इस आदमी की उम्र लगभग 80 या 90 साल होगी. आँख में बड़ा मोतिया था जिससे की वो कुछ भी साफ देख पाने में असमर्थ था. हिंदी नहीं बोलता था लेकिन गांव की खड़ी बोली कुछ कुछ बोल पाता था. नोएडा में सिर्फ अपने गांव का नाम जानता था और उसको नहीं पता था कि इतने सालों में नोएडा में एक्सप्
error: Content is protected !!