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कोरोना पर ये कैसी चाल, चुनाव के लिए रैली, पूजा के लिए समाजिक दूरी

राजेश तिवारी की रिपोर्ट

जहां एक तरफ त्योहारी सीजन चल रहा है, वहीं चुनावी में बड़ी रैलियां ये साबित कर रहा है कि कोरोना महामारी अब सरकार की साजिश बन गई है। इस साजिश को आप उदाहरण से समझते हैं।दरअसल, दशहरा के दौरान विकास खंड बनकटा के परिक्षेत्र व सोहनपुर संवाददाता सोहनपुर कुमार प्रसाद गौंड़ की मिशन ग्रामोदय के संचालक से जमीनी तहकीकात की गई। सदियों से चली आ रही दुर्गा पुजा की परम्परा पर कोरोना महामारी की वजह से तमाम बंदिशें लगा दी गई हैं, जिससे सबकुछ उदास व फीका फीका गुजर रहा है।


सोहनपुर में हर वर्ष आकर्षण का केंद्र पंडाल व मेले का हुजूम लोगों के मेल मिलाप और सौहार्द्र का एक संगम था, वह विरान और शांत लग रहा है। प्रशासन किसी भी प्रकार के कार्यक्रम की अनुमति नहीं दे रही है। वहीं चुनावी क्षेत्रों में कोरोना का कोई प्रभाव या बंदिश देखने को नहीं मिल रही है। रैलियां व सभाएँ जोर शोर से चल रही हैं। स्वयं सत्तासीन लोग जीतोड़ सभाएँ कर लोगों को अपने आश्वासन व जुमले की घुट्टी पिला रहे हैं! इस माहौल को देखकर ऐसा लगता है कि कोरोना महामारी कम, साजिश अधिक है। लोगों से कोरोना महामारी के नाम पर सोसल डिस्टेंशिंग की अपील कर लोगों के बीच के आपसी मेल व सौहार्द्र के बीच लकीर खींचने की कोशिश की गई है, क्योंकि बीमारी से बचने के लिए फिजिकल डिस्टेंस की जरुरत होती है ना की सोशल डिस्टेंस की।

सोशल डिस्टेंस का मतलब लोगों को एक—दूसरे से अलग कट कर रहना होगा। सोशल डिस्टेंस यानी सामाजिक दूरी बनाने से आपसी मेल व सौहार्द्र टुटने लगेगा। दूरिंया बढ़ेगीं और लोग समूह बद्ध न होकर एकाकी जीवन शैली अपनाने लगेगें, जो समाज के लिए एक अभिशाप होगा।

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