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सीवान का सांसद कोई भी बने, इन समस्याओं से लड़ना होगा..

लेखक—सुधीर कुमार

सीवान लोकसभा चुनाव 12 मई को संपन्न हो गया। सीवान में 56.75 फीसदी वोटिंग हुई है। अब हर किसी को 23 मई का इंतजार है। दरअसल, 23 मई को इस चुनाव के नतीजे आएंगे। इन नतीजों के साथ ही साफ हो जाएगा कि सीवान का सांसद कौन बनेगा। लेकिन सांसद कोई भी बने उसके सामने चुनौतियां कम नहीं होंगी। सीवान के नए सांसद के सामने कई चुनौतियां होंगी। आइए एक नजर डालते हैं इन चुनौतियों पर…

बिजली
सीवान के कई ऐसे गांव के घर हैं जहां बिजली का कनेक्शन नहीं पहुंचा। यकीन नहीं तो आप जिले के नौतन प्रखंड के गांवों में घूम आइए। वहां अब भी कई गांव हैं जहां लोगों के घर में बिजली का कनेक्शन नहीं है। राज्य सरकार के आदेशों के बावजूद यहां बिजली कनेक्शन के लिए शिविर नहीं लग पाता है। शहरों में 20 से 22 घंटे बिजली के वादे और गांवों में 16 से 18 घंटे बिजली देने के दावों की भी गर्मी के मौसम में पोल खुल जाती है। इस बात को आप गर्मी के मौसम में आप खुद ही समझ रहे होंगे।

सड़क
सड़कों के गड्ढे अब भी उतने ही गहरे हैं जितने कि 9 साल पहले थे। शहर के ही कई ऐसे मुहल्ले हैं जहां अब भी सड़क और नाली के लिए लोग जूझ रहे हैं। उन्हीं मेें आसी नगर और विद्दुरती हाता जैसे मोहल्लों भी शामिल हैं। यहां आज भी सड़क—नाली बनवाने के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ा है।

रोजगार
वैसे तो सीवान के लिए रोजगार कभी मुद्दा नहीं रहा है लेकिन फिर भी हम इसकी चर्चा करते हैं। रोजगार की हालत ये है कि यहां 9 साल पहले भी यहां की सुता मील समेत अन्य मीलें बंद थीं और आज भी वही हाल है। 9 साल में जिले के कितने लोगों को रोजगार मिला है या रोजगार के लिए अब तक क्या किया गया है, ये किसी को नहीं पता।

शिक्षा
यही हाल शिक्षा के साथ में भी है। लोगों को शिक्षा के सवाल से कोइ्र मतलब नहीं है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की हालत लचर बनी हुई है। जिले के डीएवी कॉलेज हो या विद्या भवन महिला कॉलेज हर जगह बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। विद्या भवन की लड़कियों ने तो हाल ही में मीठे पानी के लिए भी आंदोलन किया था। जाहिर है, इस हालत में पढ़ाई की क्या हालत होगी , आप समझ सकते हैं।

अस्पताल
सीवान में स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर जो स्थितियां हैं वो किसी से छुपी नहीं हैं। चलिए, सीवान के सरकारी सदर अस्पताल से ही बातों का सिलसिला शुरू कर लेते हैं। यहां का सच ये है कि सफाई का नामों निशान नहीं है। एक तरफ कूड़े का ढेर है तो दूसरी तरफ जन्म लेने वाले बच्चे और उनकी मां के वार्ड में आवारा कुत्तों का ठिकाना है। कई नलों के खराब होने की वजह से लोगों के पास पीने को ठंडा पानी नहीं है। एंटी रैबिज वैक्सीन जैसी दवाइंयों के लिए मरीजों को संघर्ष करना पड़ रहा है। वहीं 21 साल से बंद रेफरल अस्पताल को खोलने के लिए भी युवाओं को अनशन करना पड़ा है। दिलचस्प है कि स्वास्थ्य मंत्री भी सीवान से ही आते हैं। वहीं सरकारी अस्पतालों के बदतर हालत की वजह से निजी डाॅक्टर इसका फायदा उठा रहे हैं और जमकर पैसे बना रहे हैं।

क्राइम
आंकड़े कहते हैं कि जिले में अलग—अलग क्राइम की रफ्तार में तेजी आई है। यानी हत्या से लेकर चोरी, डकैती और गोलीबारी जैसी घटनाएं सामान्य सी होने लगी हैं। हद तो ये है कि सांसद के घर और एसपी के बंगले से चंद कदम दूरी पर मर्डर हो चुका है।

जाम और सफाई
जिले में जाम की समस्या लंबे समय से विकराल रुप में है। कोई ऐसा दिन नही जब शहर में घंटों का जाम नहीं लगता हो। नगर परिषद कहने को जाम से निपटने के लिए कई कदम उठा रही है। लेकिन सच तो ये है कि इन कोशिशों का 9 साल बाद भी कोई असर नहीं दिख रहा है। शहर में जाम से निपटने के लिए फ्लाइओवर सिर्फ अब तक 1 ही है। वहीं सफाई की बात करें तो मुख्य मार्गों पर कूड़े का अंबार लगा हुआ है। मुफस्सिल थाना के सामने का कूड़ा हो या फिर बड़हरिया मुख्य मार्ग की गंदगी हो, ऐसे नजारे आपको हर मुख्य सड़कों पर देखने को मिल जाएगी।

बैंक और एटीएम
सीवान का सच ये है कि यहां हर मौसम में, हर महीने में अधिकतर एटीएम खाली रहते हैं। वहीं जिन एटीएम में पैसे होते भी हैं वहां इतनी लंबी लाइनें लगी होती हैं कि लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। या कई ऐसे एटीएम हैं जहां यह फिक्‍स कर दिया गया है कि आप 2000 रुपए से ज्‍यादा पैसे नहीं निकाल सकते हैं। एटीएम में पैसे नहीं होने का नतीजा ये है कि करप्‍शन को भी बढ़ावा मिल रहा है। अगर बैंकों की बात करें तो यहां भी बैंक कर्मचारी लोगों से अनुशासित तरीके से बात नहीं करते हैं। वहीं लोगों को भी अपने अधिकारों के बारे में पता नहीं होता है। इसका फायदा कर्मचारी उठाते हैं। उनकी लापरवाही का नतीजा ये होता है कि लोगों का बैंक में एक दिन का काम होने में 1 सप्‍ताह का समय लग जाता है।

रेलवे : जिले में ट्रेन का तो छोड़िए रेलवे की हालत ये है कि जिले के कचहरी स्टेशन पर टिकट काउंटर तक अकसर बंद रहते हैं। यहां से कई स्टेशनों के टिकट भी नहीं मिलते हैं। वहीं जिले के रेलवे स्टेशन का स्लेटर बंद रहते हैं। ऐसे ही देश के धरोहर राजेंद्र प्रसाद की जन्मभूमि का रेलवे स्टेशन भी है। कायदे से इस स्टेशन को पर्यटन के लिहाज से बनना चाहिए था लेकिन इस पर किसी की नजर नहीं है।

दाहा नदी की स्वच्छता
दाहा नदी की स्वच्छता सीवान जिला के जनप्रतिनिधियों और नगरपरिषद के लिए कोई मुद्दा ही नहीं हैं। जिले की आम जनता भी इस मुद्दे पर मौन हैं। अगर आप जगे नहीं तो यकीन मानिए दाहा नदी विलृप्त होकर नाला बन जाएगी। अगर दाहा नदी को बचा लिया जाए तो भविष्य की पीढियों को हम शानदार उपहार दे सकते हैं। अगर जिला के सारे गाँव और गलियों में नालियों का जाल बिछाकर इसे बड़ी नाली से जोड़ना चाहिए। नाली का पानी डायरेक्ट नदी में न बहा जाए। नदी के स्वच्छता को लेकर लोगो को जागरुक करना जरुरी है।

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One Comment

  • Imran

    Bilkul Sahi , sansad koi bhi bane aam janta ko ekjut hokar in muddon ke samadhan ke liye Sarkar par dabaw banani hogi….

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