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Month: May 2019

सीवान में वकीलों में बढ़ी असुरक्षा की भावना, प्रशासन के खिलाफ आंदोलन

सीवान में वकीलों में बढ़ी असुरक्षा की भावना, प्रशासन के खिलाफ आंदोलन

लोगों को न्याय की इंसाफ दिलाने वाले वकील सीवान में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। सीवान के वकीलों में प्रशासन को लेकर गुस्सा है। दरअसल, बीते दिनों शहर के अधिवक्ता आशुतोष रंजन दूबे पर विनय कुमार पांडे नामक शख्स ने जानलेवा हमला किया। इस हमले में आशुतोष गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के बाद जिला अधिवक्ता संघ ने न्यायिक कार्य से गुरुवार को अलग रखा। संघ ने अपनी सभागार में आपात आमसभा कर घटना के आरोपित मुखिया पति विनय कुमार पांडे को गिरफ्तार करने का मांग पुलिस प्रशासन से किया। इस घटना से मर्माहत अधिवक्ता आक्रोशित थे। इस वजह से गुरुवार को व्यवहार न्यायालय का कार्य पूरी तरह ठप रहा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने भी अधिवक्ताओं से कहा कि वैसे अपराधी को शीघ्र गिरफ्तार करने के लिये अगर आपका प्रस्ताव मेरे पास आता है तो एसपी से शीघ्र गिरफ्तार करने के लिए कहुंगा। क्या है मामला जानकारी के मुताबिक आशु
सड़क हादसे में घायल तेजप्रताप घायल की स्थिति में सुधार

सड़क हादसे में घायल तेजप्रताप घायल की स्थिति में सुधार

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव की गाड़ी शुक्रवार को राजधानी पटना में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। बताया जा रहा है कि तेजप्रताप को इस हादसे में पैर में चोट आई है। जानकारी के मुताबिक अब स्थिति में सुधार हो रहा है। पुलिस के अनुसार, "राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के पुत्र तेजप्रताप यादव अपने सरकारी आवास से एक अन्य सहयोगी के साथ कार पर सवार होकर पार्टी कार्यालय की ओर जा रहे थे। इसी क्रम में पटना स्थित ईको पार्क के पास तेज प्रताप की कार विपरीत दिशा से आ रही एक अन्य कार से टकरा गई। राजद के एक नेता ने बताया कि इस हादसे में तेज प्रताप के पैर में चोट आई हैं जबकि उनके साथ उनकी कार में सवार सहयोगी को गंभीर चोट लगी है।तेजप्रताप का इलाज पटना के एक निजी अस्पताल में चल रहा है।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोनों वाहनों की रफ्तार तेज थी। दूसरी कार में सवार चार ल
हमेशा औरों से अलग राह पर क्यों चलते हैं नीतीश कुमार?

हमेशा औरों से अलग राह पर क्यों चलते हैं नीतीश कुमार?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के नरेंद्र मोदी सरकार में शामिल नहीं होने के फैसले ने बिहार में नई सियासी संभावनाओं को लेकर बहस की शुरुआत जरूर कर दी हो, लेकिन यह कोई पहला मामला नहीं है कि नीतीश अपने साथियों के पक्ष से अलग नजर आए हों। नीतीश कुमार महागठबंधन में रहे हों या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में, वे अलग फैसले लेते रहे हैं। राजनीति की दुनिया में नीतीश कुमार ने कई मौकों पर ऐसे फैसले लिए जो लोगों के लिए चौंकाने वाले रहे हैं। गौर से देखा जाए तो नीतीश जब पहले भी राजग में थे, तब भी कई मौकों पर विपक्ष के साथ खड़े होते रहे थे और आज जब एकबार फिर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ हैं, तब भी सरकार में शामिल नहीं होने के फैसला लेकर लोगों को चौंका दिया है। वैसे जानकार इसे नीतीश की अलग राजनीतिक छवि से जोड़कर देखते हैं। राजनीतिक विश्लेषक सुरेंद्र किशो
रामविलास पासवान ने संभाला अपना मंत्रालय

रामविलास पासवान ने संभाला अपना मंत्रालय

लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख राम विलास पासवान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार के दूसरे कार्यकाल में शुक्रवार को फिर एक बार खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री का कार्यभार संभाल लिया। साथ ही कहा कि वह मंत्रालय की 100 दिन की कार्ययोजना के साथ उसे लागू करने के लिए तैयार हैं। पासवान के साथ ही मंत्रालय में उनके कनिष्क दानवे दादाराव रावसाहब ने भी राज्यमंत्री का कार्यभार संभाल लिया। रावसाहब, मध्य प्रदेश से भाजपा के सांसद हैं। उनके मंत्रालय ने शुरुआती 100 दिनों में 16 लाख टन दाल और 50,000 टन प्याज के भंडारण के लिए काम करने का लक्ष्य रखा है। इसी के साथ ई-वाणिज्य दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देने, उपभोक्ता अदालतों और बीआईएस प्रयोगशालाओं का उन्नयन करने इत्यादि को भी इस कार्ययोजना का हिस्सा बनाया गया है। इसके अलावा मंत्रालय ने उपभोक्ता मामले विभाग में आर्थिक रूप से पिछड
बिहार में कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका

बिहार में कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका

लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस में नेताओं के इस्तीफा देने का दौर जारी है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस समिति के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने भी शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, गोहिल ने अपना इस्तीफा पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी को भेज दिया है। गोहिल ने अपने इस्तीफे में बिहार में लोकसभा चुनाव को लेकर अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने और वर्तमान परिस्थिति की जिम्मेवारी लेते हुए पद से इस्तीफा देने की बात कही है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष गोहिल को बिहार कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया था। इस लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों के महागठबंधन के तहत कांग्रेस चुनावी मैदान में उतरी थी। महागठबंधन में कांग्रेस के हिस्से बिहार की 40 सीटों में से नौ सीटों आई थी, जिस पर कांग्रेस ने अपने पर उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी एक सीट ही जीत पाई है।
शत्रु को मात देने वाले रविशंकर प्रसाद के बारे में कितना जानते हैं आप

शत्रु को मात देने वाले रविशंकर प्रसाद के बारे में कितना जानते हैं आप

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए एक कुशल और परिष्कृत प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद की मोदी सरकार में वापसी हुई है। प्रसाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और उनके डिप्टी एल.के. आडवाणी और बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वासपात्र साथी रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने 2019 के चुनावों में सत्ता में लौटने के बाद उन्हें अपने मंत्रिमंडल में बनाए रखा है। 1990 के दशक के मध्य में सर्वोच्च न्यायालय के वकील से नेता बने रविशंकर प्रसाद ने बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के खिलाफ चारा घोटाले में मुकदमे दायर किए। यह रविशंकर प्रसाद और दो अन्य लोग ही थे जिन्होंने जनहित याचिका दायर कर इस घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांच की मांग की। 65 वर्षीय प्रसाद ने खुद को 'पटना का लड़का' कहा, उन्होंने राज्यसभा के चार कार्यकाल के बाद पहली बार पटना साहिब सीट से लोकसभा चुनाव ल
मोदी के दूसरे कार्यकाल में मंत्री बने आरा के सांसद आर के सिंह

मोदी के दूसरे कार्यकाल में मंत्री बने आरा के सांसद आर के सिंह

बिजली क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार को लेकर चर्चित बिहार के आरा से दूसरी बार लोकसभा सदस्य चुने गये आर के सिंह को बृहस्पतिवार को नई मोदी सरकार में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में शामिल किया गया। भाजपा नीत राजग की पिछली सरकार में बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री रहे सिंह की सभी घरों को बिजली पहुंचाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना और चुनाव के नजरिये से महत्वपूर्ण सौभाग्य योजना के क्रियान्वयन में अहम भूमिका रही। बिजली मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार इस योजना के तहत बिजली से वंचित 2.63 करोड़ परिवारों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराये गये। आईएएस अधिकारी रह चुके सिंह ने देश की अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभायी। देश ने 2022 तक अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़ाकर 1,75,000 मेगावाट करने का लक्ष्य रखा है। अप्रैल 2019 तक कुल 78,000 मेगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता
सीवान समेत बिहार की जेलों में छापेमारी, जानिए क्या थी वजह

सीवान समेत बिहार की जेलों में छापेमारी, जानिए क्या थी वजह

बिहार राज्य की कई जेलों में गुरुवार सुबह छापेमारी की गई। इसमें कई जेलों से मोबाइल फोन, नशीली चीजें और आपत्तिजनक सामान बरामद किए गए हैं। पटना के बेउर जेल में शहर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गरिमा मलिक के नेतृत्व में छपेमारी की गई, जबकि मुंगेर जेल में जिलाधिकारी राजेश मीणा के नेतृत्व में छापेमारी की गई। मुंगेर के जिलाधिकारी राजेश मीणा ने बताया कि गुरुवार तड़के मुंगेर जेल में छापेमारी के दौरान एक मोबाइल फोन, खैनी सहित कई आपत्तिजनक सामान जब्त किए गए। बेउर जेल के कैदी वार्ड से भी आपत्तिजनक सामान बरामद किए गए हैं। इसके अलावा सीवान, सासाराम, गोपालगंज, आरा, जहानाबाद सहित कई जिलों की जेलों में भी जिला प्रशासन की टीमों ने छापेमारी की। इस दौरान छापेमारी टीम ने कैदी वार्डो की तलाशी ली। छापेमारी के क्रम में मोबाइल फोन, चार्जर, गांजा, खैनी और अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद किए गए। राज्य पुलिस मुख्य
जीतन राम मांझी के बदले सुर, बोले—तेजस्वी राजद के नेता, महागठबंधन के नहीं

जीतन राम मांझी के बदले सुर, बोले—तेजस्वी राजद के नेता, महागठबंधन के नहीं

लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद महागठबंधन में उठा सियासी तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। महागठबंधन में शामिल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने गुरुवार को स्पष्ट कहा कि 2020 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन का नेता अभी तक तय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी प्रसाद यादव राजद के नेता हो सकते हैं लेकिन वह अभी महागठबंधन के नेता नहीं हैं। पटना में मांझी ने पत्रकारों से कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अभी नेता या महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार तय नहीं हुआ है। महागठबंधन में शमिल सभी दलों के नेता बैठकर इस पर निर्णय लेंगे। राजद द्वारा 2020 का विधानसभा चुनाव तेजस्वी के नेतृत्व में लड़े जाने के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "तेजस्वी राजद के नेता हो सकते हैं। सभी दल के अपने नेता होते हैं प
नई मोदी सरकार के मंत्री:  गिरिराज सिंह के बारे में कितना जानते हैं आप?

नई मोदी सरकार के मंत्री: गिरिराज सिंह के बारे में कितना जानते हैं आप?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वस्त गिरिराज सिंह के राजनीतिक करियर में पिछले एक दशक में बेहद नाटकीय ढंग से उछाल आया है। मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तभी से सिंह उनके करीबी रहे हैं। 66 वर्षीय सिंह ने इस बार लोकसभा चुनाव में बेगूसराय से भाकपा उम्मीदवार कन्हैया कुमार को चार लाख से ज्यादा मतों के अंतर से हराया। बेगूसराय इस बार देश के उन चुनिंदा लोकसभा क्षेत्रों में शामिल था जिस पर सभी की निगाहें लगी हुई थी। सिंह बिहार के प्रभावशाली भूमिहार समुदाय से आते हैं। यह समुदाय कभी कांग्रेस का समर्थक हुआ करता था लेकिन मंडल के दौर के बाद भाजपा को राज्य में मजबूत करने लगा। सिंह मगध विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान ही संघ से जुड़ गये। इस दौरान वह एबीवीपी के सक्रिय सदस्य रहे। हालांकि वह राजनीति में 2002 तक गुमनाम ही रहे। 2002 में वह बिहार विधान परिषद के सदस्य निर्वाचित हुए और तीन साल के बाद नीत
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